मुस्लिम समुदाय हज के आखिरी पड़ाव पर
Riyadh , Riyadh ,  Saudi Arabia , Asia   | अपडेटेड: Monday, Sep 12, 2016 at 09:11 am EST

मक्का जहा पैगम्बर मोहम्मद ने 1400 साल अपने अपनी अपन अंतिम उपदेश दिया था, इस रविवार शाम के पहले पूरी दुनिया से आए मुस्लिम तीर्थयात्रियों ने वहां की पहाड़ी की चढ़ाई शुरू कर दी.
माउंट अराफात में बिताया गया दिन पांच दिवसीय हाजी तीर्थ का शिखर है, जहाँ सभी चुस्त-दुरुस्त मुस्लिमों को एक बार जाना अनिवार्य है. मुस्लिमों ने वहां बिताया गया दिन घोर पूजा में बिताया जहाँ वे ज्यादातर रोते रहे और अपने पापों के प्रायश्चित के लिए खुदा से मांफी मागते रहे.
मक्का से लगभग 20 किमी दूर स्थित, माउंट आराफात पर की गयी दुआओं के बारे में माना जाता है कि वे पुराने पापों को खत्म कर नई शुरुआत का मौका देती है. इस हज यात्रा को न कर पाने वाले कई मुस्लिम सामान कारणों से इस दिन सुबह से शाम तक रोजा (व्रत) रखते हैं.
इस पांच दिवसीय हज यात्रा को दौरान हांजी जो सफ़ेद टेरीक्लॉथ का कपड़ा पहनते हैं वह बिना सिला हुआ होता है – इस प्रतिबंध का आशय सभी मुस्लिमों की समानता से है जो अमीर मुसलामानों को उनके ज्यादा बढ़िया कपड़ों की वजह से उनकी पहचान अलग करने से रोकता है.
आराफात का दिन हज के दौरान एक बार आता है जब सभी हाजी एक समय में एक स्थान पर होते हैं. 160 अलग अलग देशों से आए सभी लोगों लोगों का समान पहनावा निश्चित रूप से विस्मयकारी है.
हज शारीरिक तथा भावनात्मक तौर पर एक थकाऊ अनुभव है, और इस साल तो आराफात का तापमान 42 डिग्री तक ऊपर पहुँच गया था. स्वयंसेवकों ने धुप से बचाव के लिए हाजियों को पानी, जूस तथा छाता पेश किया.
सूरज ढलने के बाद, आराफात से 9 किमी दूर, हाजी मुज्दालिफा नामक इलाके की ओर बढ़ेंगे. कई सारे लोग पैदल मार्ग का इस्तेमाल करते हैं वाही अन्य लोग बसों से जाते हैं.वे वहां अपनी रात बिताते हैं, ज्यादातर लोग खुले में एक दूसरे से चिपट कर पड़े रहते हैं. हाजी रास्ते भर पत्थर इक्कट्ठे करते हैं जिसका इस्तेमाल वे ‘मीना के शैतान’ पर बरसाते हुए करते हैं. मुस्लिमों के अनुसार मीना ने पैगम्बर मोहम्मद से बात करने की कोशिश की थी.



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