संविधान के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को चमकाया पं.नेहरू ने
आशा त्रिपाठी  | अपडेटेड: Thursday, Nov 14, 2013 at 07:33 am EST

बाल दिवस और पं.जवाहर लाल नेहरू के जन्म दिन (14 नवंबर) पर विशेष

आज बाल दिवस है। बाल दिवस यानी देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं.जवाहरलाल नेहरू का जन्म दिन। स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री और 6 बार कांग्रेस अध्यक्ष के पद को सुशोभित करने वाले पं.जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवम्बर, 1889 को इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ। हैरो और कैम्ब्रिज में पढ़ाई कर 1912 में नेहरूजी ने बार-एट-लॉ की उपाधि ग्रहण की और वे बार में बुलाए गए। 1942 के 'भारत छोड़ो' आंदोलन में नेहरू 9 अगस्त 1942 को बंबई में गिरफ्तार हुए और अहमदनगर जेल में रहे, जहां से 15 जून 1945 को रिहा किए गए। आजादी के पहले गठित अंतरिम सरकार में और आजादी के बाद 1947 में भारत के प्रधानमंत्री बने और 27 मई 1964 को अपने निधन तक इस पद पर बने रहे। नेहरू के कार्यकाल में लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करना, राष्ट्र और संविधान के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को स्थायी भाव प्रदान करना और योजनाओं के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को सुचारु करना उनके मुख्य उद्देश्य रहे। नेहरू शुरू से ही गांधीजी से प्रभावित रहे और 1912 में कांग्रेस से जुड़े। 1920 के प्रतापगढ़ के पहले किसान मोर्चे को संगठित करने का श्रेय उन्हीं को जाता है। 1928 में लखनऊ में साइमन कमीशन के विरोध में नेहरू घायल हुए और 1930 के नमक आंदोलन में गिरफ्तार हुए। उन्होंने 6 माह जेल काटी। 1935 में अल्मोड़ा जेल में 'आत्मकथा' लिखी। उन्होंने कुल नौ बार जेल यात्राएं कीं। नेहरू ने पंचशील का सिद्धांत प्रतिपादित किया और 1954 में 'भारत रत्न' से अलंकृत हुए। नेहरू ने तटस्थ राष्ट्रों को संगठित किया और उनका नेतृत्व किया। नेहरू को बच्चों से बेहद प्यार व लगाव था। इसीलिए उन्हें चाचा नेहरू कहा गया।

बतौर देश के पहले प्रधानमंत्री पं.नेहरू को तीन मूर्ति भवन में सरकारी आवास मिला था। एक दिन तीन मूर्ति भवन के बगीचे में लगे पेड़-पौधों के बीच से गुजरते हुए घुमावदार रास्ते पर नेहरूजी टहल रहे थे। उनका ध्यान पौधों पर था। वे पौधों पर छाई बहार देखकर खुशी से निहाल हो ही रहे थे तभी उन्हें एक छोटे बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। नेहरू ने आसपास देखा तो उन्हें पेड़ों के बीच एक दो माह का बच्चा दिखाई दिया जो दहाड़ मारकर रो रहा था। नेहरू ने मन ही मन सोचा कि इसकी मां कहां होगी? उन्होंने इधर-उधर देखा। वह कहीं भी नजर नहीं आ रही थी। चाचा ने सोचा शायद वह बगीचे में ही कहीं माली के साथ काम कर रही होगी। नेहरू यह सोच ही रहे थे कि बच्चे ने रोना तेज कर दिया। इस पर उन्होंने उस बच्चे की मां की भूमिका निभाने का मन बना लिया। नेहरू ने बच्चे को उठाकर अपनी बांहों में लेकर उसे थपकियां दीं, झुलाया तो बच्चा चुप हो गया और मुस्कुराने लगा। बच्चे को मुस्कुराते देख चाचा खुश हो गए और बच्चे के साथ खेलने लगे। जब बच्चे की मां दौड़ते हुए वहां पहुंची तो उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ। उसका बच्चा नेहरूजी की गोद में मंद-मंद मुस्कुरा रहा था।

ऐसे ही एक बार जब पं.नेहरू तमिलनाडु के दौरे पर गए तब जिस सड़क से वे गुजर रहे थे वहां लोग साइकलों पर खड़े होकर तो कहीं दीवारों पर चढ़कर नेताजी को निहार रहे थे। प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए हर आदमी इतना उत्सुक था कि जिसे जहां समझ आया वहां खड़े होकर नेहरू को निहारने लगा। इस भीड़ भरे इलाके में नेहरू ने देखा कि दूर खड़ा एक गुब्बारे वाला पंजों के बल खड़ा डगमगा रहा था । ऐसा लग रहा था कि उसके हाथों के तरह-तरह के रंग-बिरंगी गुब्बारे मानो नेहरू को देखने के लिए डोल रहे हो। जैसे वे कह रहे हों हम तुम्हारा तमिलनाडु में स्वागत करते हैं। नेहरू की गाड़ी जब गुब्बारे वाले तक पहुंची तो गाड़ी से उतरकर वे गुब्बारे खरीदने के लिए आगे बढ़े तो गुब्बारे वाला हक्का-बक्का-सा रह गया।  नेहरू ने अपने तमिल जानने वाले सचिव से कहकर सारे गुब्बारे खरीदवाए और वहां उपस्थित सारे बच्चों को गुब्बारे बंटवा दिए। ऐसे प्यारे चाचा नेहरू को बच्चों के प्रति बहुत लगाव था। नेहरू के मन में बच्चों के प्रति विशेष प्रेम और सहानुभूति देखकर लोग उन्हें चाचा नेहरू के नाम से संबोधित करने लगे और जैसे-जैसे गुब्बारे बच्चों के हाथों तक पहुंचे बच्चों ने चाचा नेहरू-चाचा नेहरू की तेज आवाज से वहां का वातावरण उल्लासित कर दिया। तभी से वे चाचा नेहरू के नाम से प्रसिद्ध हो गए।  बच्चों के प्रति उनका यह प्रेम ही था जो नेहरू ने अपने जन्म दिन को बाल दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। जवाहरलाल नेहरू ने नेताओं की छवि से अलग हटकर एक ऐसी तस्वीर पैदा की जिस पर चलना आज के नेताओं के बस की बात नहीं।

पं.नेहरु की जिंदगी पश्चिमी सभ्यता से जरूर प्रभावित थी पर साथ ही वह अपने देश से भी जुड़े हुए थे। पं.नेहरू कश्मीरी ब्राह्मण परिवार के थे, जो अपनी प्रशासनिक क्षमताओं तथा विद्वत्ता के लिए विख्यात थे। पं.नेहरु की प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई। 14 वर्ष की आयु में नेहरू ने घर पर ही कई अंग्रेज़ अध्यापिकाओं और शिक्षकों से शिक्षा प्राप्त की। 15 वर्ष की उम्र में 1905 में नेहरू एक अग्रणी अंग्रेजी विद्यालय इंग्लैण्ड के हैरो स्कूल में भेजे गए। नेहरू 1912 में भारत लौटे और वकालत शुरू की। मार्च 1916 में नेहरू का विवाह कमला कौल के साथ हुआ, जो दिल्ली में बसे कश्मीरी परिवार की थीं। उनकी अकेली संतान इंदिरा प्रियदर्शिनी का जन्म 1917 में हुआ। नेहरु का मन वकालत में ज्यादा नहीं लगता था और इसीलिए उन्होंने राजनीति को अपना क्षेत्र चुन लिया। गांधी ने उनकी क्षमताओं को समझा और उन्हें युवा कांग्रेस की कमान दे दी। नेहरु ने भी गांधीजी की राह पर चलते हुए नरमपंथी और सत्याग्रह जैसे हथियारों का प्रयोग करते हुए स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी। उन्होंने अपने राजनैतिक कैरियर में भारत को कई उपलब्धियां दिलाईं। हालांकि कुछ मौको पर नेहरु की दूरदर्शिता पर सवाल उठे हैं। लोग उन्हें ही कश्मीर, पाकिस्तान और चीन के मध्य तनाव की वजह मानते हैं।

नेहरु आधुनिक विचार और पश्चिमी सभ्यता से काफी लगाव रखते थे जिसकी झलक उनके रहन-सहन में देखने को मिलती थी। सिगरेट पीना, काला चश्मा लगाना, गुलाब साथ लेकर चलना उनकी कुछ पसंदीदा चीजें थीं। चीन के साथ संघर्ष के कुछ ही समय बाद नेहरू के स्वास्थ्य में गिरावट के लक्षण दिखाई देने लगे। उन्हें 1963 में दिल का हल्का दौरा पड़ा, जनवरी 1964 में उन्हें और दुर्बल बना देने वाला दौरा पड़ा। कुछ ही महीनों के बाद तीसरे दौरे में 27 मई, 1964 में उनकी मृत्यु हो गई। जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उन्होंने योजना आयोग का गठन किया, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास को प्रोत्साहित किया और तीन लगातार पंचवर्षीय योजनाओं का शुभारंभ किया। उनकी नीतियों के कारण देश में कृषि और उद्योग का एक नया युग शुरु हुआ। नेहरू ने भारत की विदेश नीति के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाई।

हालांकि नेहरु जी का जीवन कई बार अपेक्षाओं और कई कारणों से विवादों में रहा। कई लोगों का कहना था कि नेहरू ने अन्य नेताओं की तुलना में भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में बहुत कम योगदान दिया था। फिर भी गांधी ने उन्हें भारत का प्रथम प्रधानमंत्री बना दिया। इसके साथ ही लेडी माउंटबेटन के साथ उनकी नजदीकियों को भी इतिहासकारों ने विवादित माना। इसी के साथ लोग कश्मीर की हालिया समस्या को लोग जवाहरलाल नेहरु की ही गलती मानते हैं और चीन द्वारा भारत पर आक्रमण पर उनके रवैये का भी लोगों ने खासा विरोध किया। चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने के बावजूद नेहरु जी ने संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिये चीन का समर्थन किया। कई लोग नेहरु पर यह भी आरोप लगाते है कि उन्होंने सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु के बाद उनका पता लगाने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाया।

संपर्क--- Asha Tripathi, P-2, Flat No. 145
Deepganga Apartment, SIDCUL, Roshnabad
Haridwar (Uttarakhand).



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