नई सरकार के लिए आईएस से निपटना चुनौती
राजीव रंजन तिवारी  | अपडेटेड: Thursday, Sep 11, 2014 at 04:07 am EST

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने इराक में एक नई सरकार के गठन का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही इस बात पर भी ज़ोर दिया है कि देश के सुरक्षा विभागों के प्रमुखों की नियुक्ति शीघ्र की जाए। साथ ही अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन कैरी ने इराक में नई सरकार के गठन को इस्लामवादी कट्टरपंथियों के विरुद्ध लड़ाई में ‘मील का पत्थर’ बताया है। दरअसल, इराक की संसद ने पिछले दिनों हैदर अबादी की अगुआई में देश में नई सरकार के गठन की मंजूरी दे दी। अबादी बहुत जल्द प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। पूर्व विदेश मंत्रियों होशियार जेबारी और सालेह मुतलाक को उप प्रधानमंत्री घोषित किया गया है। संसद ने हालांकि गृह मंत्री या रक्षा मंत्री पद के लिए किसी के नाम को मंजूरी नहीं दी है। जबकि अदेल अब्देल मेंहदी तेल मंत्री और इब्राहिम जाफरी विदेश मंत्री होंगे। रोज नूरी शावेज को वित्त मंत्री बनाया गया है। 328 में से 289 सासदों ने उप प्रधानमंत्रियों और 21 मंत्रियों की नियुक्ति को मंजूरी दी। अमेरिका के राष्ट्रपति बाराक ओबामा ने इराक के नए प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी को नई सरकार के लिए मंजूरी मिलने पर बधाई देने के लिए फोन किया। व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया कि ओबामा ने नई और व्यापक आधार वाली सरकार बनाने के लिए प्रधानमंत्री के प्रयासों की सराहना की और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवांत के खतरे से निपटने के लिए इंटरनेशनल कम्युनिटी से मिलकर काम करते रहने की जरूरत पर बल दिया। अब सवाल यह है कि क्या इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकियों से लड़ने के लिए समर्थन जुटाने में नई सरकार कामयाब हो पाएगी। यह उसके लिए बड़ी चुनौती है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों अरब लीग के विदेश मंत्रियों ने इस्लामिक स्टेट और अन्य चरमपंथी संगठनों के खिलाफ आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठाने और इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर उठाए जा रहे कदमों में अपना सहयोग देने का फैसला किया। काहिरा में अरब लीग के विदेश मंत्रियों ने इराक और अन्य जगहों पर इन चरमपंथी संगठनों की गतिविधियों से पैदा हुए खतरे पर विचार विर्मश के बाद यह फैसला लिया। अरब लीग प्रमुख ने सदस्य देशों से अपील की कि वह इस्लामिक स्टेट का सैन्य और राजनीतिक रूप से मुकाबला करें। हथियार उठाने की अपील ऐसे मौके पर आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा इन आतंकियों को रोकने के लिए अपनी योजना अमेरिकी सांसदों और जनता के सामने पेश करने वाले हैं। अरब लीग में 22 सदस्य हैं, यह ओबामा के अंतरराष्ट्रीय गठबंधन को तैयार करने के प्रयास को पूरे मध्य पूर्व में महत्वपूर्ण सहायता दे सकता है। इस्लामिक स्टेट ने इराक और सीरिया के बड़े इलाकों पर कब्जा कर लिया है। लोगों में खौफ और अपना राज कायम करने के लिए उसने सामूहिक हत्याओं और सिर कलम जैसी घटनाओं को अंजाम दिया है। पहले से ही नाटो ने इन आतंकियों से मुकाबला करने की सहमति दे दी है। अरब लीग के प्रमुख नबील अल अरबी ने कहा कि अरब देशों को स्पष्ट और दृढ़ निर्णय के साथ कैंसर जैसे आतंकवादी समूहों से टक्कर की जरूरत है। अरब लीग में मिस्र, सऊदी अरब, जॉर्डन, लेबनान, कतर, संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं।
इसी क्रम में अमेरिका ने इराक के अनबर प्रांत में इस्लामिक स्टेट के जिहादियों पर हमला किया। इस इलाके में आतंकवादी लंबे समय से चुनौती दे रहे थे। अमेरिकी सेना का कहना है कि आईएस का कमांड पोस्ट, कई गाड़ियां जिनमें दो एंटीक्राफ्ट हथियार वाली गाड़ियां भी थीं, हमले में तबाह हो गईं । सबके बावजूद यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अरब लीग आईएस के खिलाफ पश्चिमी अभियान के लिए किस तरह के कदम उठाएगा। और इस कदम के लिए आम सहमति तक पहुंच पाना अरब दुनिया के नेताओं के लिए जटिल हो सकता है। खैर, हफ़्तों के राजनैतिक गतिरोध के बाद इराक़ी संसद ने प्रधानमंत्री हैदर अल-आबदी के नेतृत्व में एक नई, सम्मिलित सरकार को मंज़ूरी दे दी। नई सरकार को इस्लामिक स्टेट चरमपंथियों के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए अहम माना जा रहा है। इराक़ के लगभग एक तिहाई इलाके पर आईएस का कब्ज़ा है। सत्ता में भागीदारी के एक समझौते के तहत कई मंत्रालयों को बहुसंख्यक शिया समुदाय, सुन्नी और कुर्द समुदायों के बीच बांट दिया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री  नूरी अल-मलिकी के इस्तीफ़े के बाद उदारवादी शिया नेता हैदर अल-आबदी को सरकार बनाने के लिए कहा गया था। अल-मलिकी को जबरन इस साल अगस्त में इस्तीफ़ा देना पड़ा था। सुन्नी अरब और कुर्दी समुदायों ने उनकी सरकार पर सांप्रदायिक नीतियों का समर्थन करने का आरोप लगाया था।
उल्लेखनीय है कि बीते माह इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने पद छोड़ने की घोषणा की थी। मलिकी ने मनोनीत प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी का सहयोग देने का वादा भी किया था। मलिकी ने कहा था कि मैं आज आपके सामने ये घोषणा करता हूं कि राजनीतिक प्रक्रिया में सहूलियत और नए सरकार के गठन के लिए मैं अबादी के पक्ष में अपनी उम्मीदवारी वापस ले रहा हूं। अमेरिका ने भी मलिकी के इस फ़ैसले का स्वागत किया था। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सुज़ैन राइस ने कहा था कि कि ये इराक़ की एकता की दिशा में एक बड़ा क़दम है। इससे कुछ दिन पहले इराक़ के राष्ट्रपति फ़ौद मासूम ने संसद के डिप्टी स्पीकर हैदर अल अबादी को प्रधानमंत्री मनोनीत करने की घोषणा की थी। उस वक्त नूरी अल मलिकी ने इस फैसले का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि अबादी का मनोनयन असंवैधानिक है। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अबादी का समर्थन किया था और उम्मीद जताई थी कि उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में जातीय और सांप्रदायिक हिंसा रुकेगी। दरअसल, सुन्नी चरमपंथी गुट इस्लामिक स्टेट ने उत्तरी इराक़ के बड़े हिस्से पर अपना क़ब्ज़ा जमाया हुआ है। बहरहाल, नई सरकार के गठन के बाद भी हालात ज्यों के त्यों बने हुए हैं। अब देखना यह है कि इराकी आतंकियों पर यह सरकार कितना अंकुश लगा पाती है।
संपर्कः राजीव रंजन तिवारी, द्वारा- श्री आरपी मिश्र, 81-एम, कृष्णा भवन, सहयोग विहार, धरमपुर, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश), पिन- 273006. फोन- 08922002003.



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